वाजीकरण नुस्खे, वाजीकरण योग व् वाजीकरण औषधियां, Vajikarana Tila (Hindi : वाजीकरण तिला )

वाजीकरण तिला के फायदे, घटक द्रव्य, निर्माण विधि, मात्रा और सेवन विधि.

वाजीकरण नुस्खे, वाजीकरण योग व् वाजीकरण औषधियां, Vajikarana Tila (Hindi : वाजीकरण तिला )

वाजीकरण तिला के फायदे, घटक द्रव्य, निर्माण विधि, मात्रा और सेवन विधि.



Vajikaran Food and Diet: Aphrodisiac and Analeptic Ayurvedic Remedies

Biovatica.Com receives many emails from youngsters and middle-aged men who generally ask us to provide details about the Ayurveda remedies for sexual health, which can be easily prepared at home. In response to those messages we are listing here some of the best vajikarana home remedies which can be prepared at home and which have the Aphrodisiac and analeptic qualities.

Before presenting the Vajikarana foods and remedies, we would like to speak about 2-3 things which are associated with vajikarana remedies. So that, users can get the full advantages and health benefits of these vajikarak or vajikarana remedies. You must be aware that if the right thing used in a wrong way, or is used in a wrong manner, then it does not give appropriate, right or desired results. The same thing is applied in the use of vajikarana remedies. Sometimes we receive emails where users have written that they did not get expected results, or in some cases, no results after using some vajikarana remedies. Now we, at Biovatica.Com have met some Ayurveda experts and Vaidyas who have successfully got their patients use these vajikarana Ayurveda remedies in their direction and care and their patients started jumping like a horse within 2 to 3 months of taking these vajikarana remedies. So, we would like to give few hints to the users who send us these complaining emails.

Let us first understand the meaning and origin of the word “ Vajikarana ”. The origin of the word Vajikarana lies in this Sanskrit shloka ;-

" वाजं शुक्रं ना वाजं अवाजम वाजिक्रियते इति वाजिकरनम "

Which means, fulfilment and strengthening of shukra dhaatu (sperm, mineral or element) in the body of a person whose shukra dhaatu (sperm, mineral or element) has become weak or withered, is called vajikarana. When all seven elements of the body are present in full quantity or body is filled with all seven dhaatus or elements, then they increase the power, strength, intellect, vigour, virility and luster. Hence, it is said:-

" यशं श्रीयम् बलं पुष्टि वाजिकरणमेव तत् "

Which means, the use of those ayurvedic remedies that help the body get back its prestige, prosperity, grace, luster, power, strength and energy are called Vajikarana.

Before starting the use of vajikarana remedies, user should think about his/her digestion capacity and the season/weather. First, take corrective measure to purify your digestion system and digestive health and when the season is appropriate and right, only then start taking vajikarana remedies in an appropriate manner and right quantity. Otherwise, instead of getting positive health benefits from these vajikarana remedies, you may get negative results. Even if you do not lose anything, but not gaining something is also a type of loss. When body's digestion power is good and strong, crap evacuation is done properly, there is no constipation , aahar-vihar (eating habits and diet regimen) and aachar-vichaar (thoughts, thinking , mind control and behaviour) are good, weather is not hot but cool and pleasant, only then use of vajikarana remedies give the maximum and desired health benefits. That is why winter season and cool places are necessary and useful for the use of vajikarana remedies.

Our tried and tested best Vajikarana remedies / formulas:-

1)   Kheer of Urad Daal , or Udad Dal ( kheer of black gram, Vigna mungo)(Hindi : उड़द की खीर )
Urad Daal Kheer Urad Daal Kheer

Preparation method – put 20 grams skinless Urad Dal in a glass of water in night. Next morning, grind this Dal in mixer and then cook in pure ghee for a while so that it becomes slightly pink in colour. After this, boil milk in a bowl for some time. When the Viscosity of milk has increased noticeably, put the cooked Urad Dal in the boiling milk. Now cook and boil the entire solution like a kheer .

Quantity and dosage: - eat this kheer every morning before 8 0'clock as a breakfast regularly. Take your meal at least after 2-3 hours of eating the kheer . Quantity of dal can be increased as per your digestion power and interest. One glass of milk is enough for quantity. Use this vajikaran home remedy as long as winter season or cold weather is there. This vajikarana remedy is very easy and simple to prepare at home and at the same time is very effective and unparalleled in giving sexual health benefits.

2) Vajikarana Tila (Hindi : वाजीकरण तिला )

Vajikarana Tila ingredients: kukkutaand of good quality and fresh – 50 and Somal ( Sankhiya ) – 20 grams.

Vajikarana Tila preparation method: : Remove the external white shells of kukkutaand (hen's eggs). Then put its internal yellow portion in a bowl. Now prepare a churna or powder of Somal and put it also in the bowl. Now cook the entire solution in the low flame for a while. When it is cooked properly, take out the oil and fill it in a bottle. This is called Vaikarana Tila or Vajikaran Tail, or Vajikarana tailam (Oil).

Vajikarana Tila quantity and usage/application: Drops of Vajikarana tila is applied on the entire outer skin of penis (except the portion of shaft and testicles). Apply 1-2 drops of it on penis and gently massage until the oil is totally absorbed by the skin.

Vajikarana Tila advantages and health benefits: Vajikarana tila helps the patients whose penis has become weak, loose or bent due to over-masturbation. Correct use and application of vajikarana tila makes the penis healthy and powerful again.

A product similar to vajikarana tila is available in most Indian ayurvedic shops whici is called ‘Masti tel' or Masti Oil.


वाजीकरण नुस्खे, वाजीकरण योग व् वाजीकरण औषधियां

वाजीकरण नुस्खे का सेवन विवाहित पुरुषों को ही करना चाहिए. वाजीकरण का मतलब होता है शुक्र (वीर्य ) उत्पन्न करना - आयुर्वेद के अनुसार शरीर में शुक्र क्षीण हो जाने पर फिर से शुक्र उत्पन्न करने को वाजीकरण कहा जाता है. आयुर्वेद ने वाजीकरण के बारे में यह भी कहा है की जिन द्रव्यों या औषधियों के सेवन से यश, शोभा, बल तथा पुष्टि प्राप्त होती है उन्हें वाजीकरण कहते हैं. वाजीकरण औषधियों का नियमित सेवन करने पर पुरुष में अप्रतिहत वेग वाले बलवान (वाजी=घोडा ) घोड़े के सामान, स्त्री-सहवास की शक्ति और क्षमता उत्पन्न होती है. यह शक्ति बढ़ेगी तो इसका उपयोग करना जरुरी हो जायेगा इसलिए ऐसे वाजीकरण नुस्खों का सेवन विवाहित पुरुषों को ही करना चाहिए. Biovatica .Com यहाँ पर विवाहित पुरुषों के लिए श्रेष्ठ तथा शीघ्रपतन की शिकायत दूर करने वाले अनुभूत नुस्खे और प्रयोग प्रस्तुत कर रहे हैं. कोई भी एक नुस्खा इस शीतकाल में २-३ मॉस तक नियमित रूप से सेवन करें और चमत्कार देखें. नीचे लिखे सभी वाजीकरण योग और नुस्खे एक दूसरे से बढ़कर है.

१) पहला वाजीकरण नुस्खा - बड़ा ही सरल और सस्ता उपाय है पर बेहद फायदेमंद है. पंसारी के यहाँ से एक किलो कौंच के बीज ले आएं. इन्हे चार लीटर दूध में डालकर खूब उबालें. जब बीज नरम पड़ जाएँ और छिलका उतारा जा सके तब नीचे उतार कर ठंडा कर लें. दूध विषाक्त हो चुका होगा इसलिए दूध ऐसी जगह फेंके जहाँ कोई पशु इसे चाट भी ना सके. छिलके उतार कर फेंक दें और गिरी को खूब सुखा कर , कूट-पीस कर, बारीक चूर्ण कर लें. इस चूर्ण का सेवन ३ ग्राम (लगभग आधा चम्मच ) मात्रा से शुरू करें . प्रति सप्ताह आधा चम्मच बढ़ाते रहें और २० ग्राम ( चार चम्मच के लगभग ) तक मात्रा बढ़ाकर फिर इसी मात्रा में सेवन करते रहें. ऐसी एक मात्रा सुबह खाली पेट और दूसरी मात्रा शाम को भोजन के दो घंटे बाद एक गिलास गर्म दूध के साथ लेनी है. दूध में शुद्ध घी डालना है. शुरू में (पिघले हुए ) घी की मात्रा एक सप्ताह तक पाव (चौथाई ) चम्मच, दूसरे सप्ताह आधा चम्मच और तीसरे सप्ताह पौन (३/४) चम्मच और चौथे सप्ताह १ चम्मच लेने लगें. फिर इसकी मात्रा अपनी पाचन शक्ति के अनुसार बढ़ाएं . इसकी मात्रा २० मिली . से ज्यादा न बढ़ाएं. एक खुराक में २० मिली. शुद्ध घी लेना पर्याप्त होगा.

इस वाजीकरण प्रयोग के लाभ - इसके लाभों का वर्णन करना अतिशयोक्तिपूर्ण और अशोभनीय लगेगा. सिर्फ इतना कह देना काफी समझते हैं की यह प्रयोग नियम से पूरे शीतकाल के दिनों में यानी कम से कम ३ माह सेवन करके खुद ही देख लें. परीक्षित है.

२) दूसरा वाजीकरण नुस्खा - यह भी बहुत सरल नुस्खा है लेकिन रामबाण की तरह अक्सीर है. इसमें एक शर्त है की घी भी गाय के दूध का हो और दूध भी गाय का ही हो, बस. मुलहठी को खूब कूट-पीस कर महीन चूर्ण करके रख लें. इस चूर्ण को १० ग्राम (लगभग दो छोटे चम्मच ) लेकर आधा चम्मच गोघृत और डेढ़ चम्मच (तिगुनी मात्रा में ) शहद मिला लें. शहद और घी को समान मात्रा में नहीं मिलते हैं. इस मिश्रण को चाटकर साथ में घूंट-घूंट करके मिश्री मिला हुआ ठंडा जो-घृत (गाय का दूध ) पीते रहें. शहद के साथ गरम दूध नहीं पिया जाता अतः दूध बिलकुल ठंडा कर लें.

इस वाजीकरण नुस्खे के लाभ - यह नुस्खा बहुत ही गुणकारी है, कोई खटपट भी नहीं है. बस, लगातार सुबह शाम ( सुबह खाली पेट और शाम को भोजन के दो घंटे बाद ) कम से कम ३ माह सेवन करें. ज्यादा भी करें तो कोई हर्ज़ नहीं है. यह एक परिक्षिक वाजीकारक नुस्खा है और अनेक विवाहित पुरुष इसका सेवन कर चुके हैं.

३ ) तीसरा वाजीकारक नुस्खा - कौंच के बीजों की गिरी, शतावर, तालमखाने के बीज, मुलहठी, असगंध नागोरी, नाग बाला की जड़ और अतिबला की जड़ - सब १०-१० ग्राम, गाय का दूध १० लीटर , शक्कर ५ किलो और शुद्ध घी १ किलो . सातों दवाओं को खूब कूट-पीस कर सबको मिला लें और मैदा छानने की चलनी से तीन बार छान लें. दूध को मंदी आंच पर चढ़ा कर हिलाते चलाते हुए औंटा कर खोया बनाना शुरू करें. जब चौथाई भाग यानी ढाई लीटर दूध जल जाये तब सब दवाओं का मिला हुआ चूर्ण इसमें डालकर हिलाते चलाते रहें. खोया बन जाए तब नीचे उतार लें. एक साफ़ बड़ी कढ़ाई में १ किलो घी डालकर गरम करें. जब घी अच्छा गरम हो जाये तब उसमे खोया (मावा) डालकर मंदी आंच पर अच्छा गुलाबी होने तक भूनें. जब सुगंध आने लगे पर मावा जल न पाए तब उतार लें . इसमें ५०-५० ग्राम बारीक कटे हुए बादाम, पिस्ता, किशमिश और चिरोंजी डाल दें और ५०-५० ग्राम के लड्डू बाँध लें. सुबह खाली पेट एक लड्डू खूब अच्छी तरह चबा चबाकर खाएं और साथ साथ मिश्री मिला हुआ १ गिलास दूध घूंट घूंट करके पीते जाएँ. इसके दो घंटे बाद भोजन करें. इसी तरह एक लड्डू शाम के भोजन के दो घंटे बाद सोने से पहले खाएं. कम से कम ३ माह तक सेवन करें.

इस वाजीकरण नुस्खे के लाभ - यह नुस्खा इतना पौष्टिक और बलवीर्यवर्द्धक है की लिख नहीं सकते. पूरे शीतकाल भर यानी जब तक गर्मी न शुरू हो जाए तब तक नियमित रूप से इसका सेवन करने पर किसी भी कारण से नपुंसकता हो, दूर हो जाती है. श्रेष्ठ , निरापद एवं अत्यंत यौन-शक्ति देने वाला यह नुस्खा विवाहित पुरुषों को अवश्य सेवन करना चाहिए.

४) चौथा वाजीकारक नुस्खा - कौंच के छिलकरहित बीज (गिरी) चार किलो, गाय का दूध २० लीटर, गोघृत आधा किलो, जायफल, जावित्री, कंकोल, लौंग, अजवाइन, अकरकरा, समुद्रशोथ, सौंठ, पीपल, काली मिर्च, नागकेसर, तेजपात, दालचीनी, इलायची छोटी, सफ़ेद जीरा, प्रियंगु, और गजपीपल - सब १०-१० ग्राम पिसे हुए , आठ किलो शक्कर या मिश्री . सब दवाओं को खूब कूट-पीस कर महीन चूर्ण करके चलनी से तीन बार छान लें ताकि सब ठीक से मिलकर एक जान हो जाएँ. बीस लीटर दूध में चार किलो कौंच के बीज की गिरी डालकर आंच पर चढ़ा कर पकाएं और खोया बनायें. एक साफ़ बड़ी कढ़ाई में आधा किलो घी डालकर गरम करें और खोया डालकर खूब अच्छा गुलाबी होने तक भूनें . जब अच्छा भून जाए तब नीचे उतार लें. आठ किलो शक्कर या मिश्री की चाशनी बनाकर इसमें खोया डालकर हिलाने चलाने के बाद नीचे उतार कर सब दवाओं का मिश्रण डाल दें और हिला चला कर अच्छी तरह से मिला लें. अब या तो इसके २०-२० ग्राम वज़न के लड्डू बाँध लें या बड़े थाल में जमा कर बर्फी काट लें.

इस वाजीकरण नुस्खे के लाभ - इन लड्डुओं या बर्फी को २०-२० ग्राम मात्रा में सुबह खाली पेट और शाम को भोजन के दो घंटे बाद नियमित रूप से ३-४ माह तक, जब तक गर्मी न शुरू हो, तब तक सेवन करें. यह नुस्खा बेजोड़ वाजीकरण करने वाला है. कितनी ही कमज़ोरी, शिथिलता और नपुंसकता की स्थिति हो, इसके सेवन से नक्शा ही बदल जाता है. भरपूर यौनशक्ति, स्तम्भनशक्ति एवं यौन-क्षमता देनेवाला यह नुस्खा प्रमेह, धातु-क्षीणता, मूत्र-विकार, वात रोग तथा अन्य प्रकार की निर्बलता दूर कर पुरुष को फौलाद की माफिक मज़बूती और कठोरता प्रदान करने वाला श्रेष्ठ वाजीकारक योग है. इसको सेवन करने वाला दीर्घकाल तक युवा बना रहता है.