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प्रमेह गज केसरी वटी ( Prameha Gaj Kesari Vati )
Prameha Gaj Kesari Vati

इस आर्टिकल में Biovatica .Com द्वारा अनेक रोगों का शमन करने वाले एक गुणकारी उत्तम आयुर्वेदिक योग "प्रमेह गज केसरी वटी " के बारे में विवरण प्रस्तुत किया जा रहा है. प्रमेह गज केसरी वटी मधुमेह को नियंत्रित करने में सफल सिद्ध होने वाला निरापद योग है. इसका सम्पूर्ण विवरण यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है.

प्रमेह गज केसरी वटी के घटक द्रव्य ( ingredients of prameha gaja kesari vati ) - लोह भस्म, नाग भस्म और बंग भस्म - प्रत्येक १०-१० ग्राम, अभ्रक भस्म ४० ग्राम, शुद्ध शिलाजीत ५० ग्राम, गोखरू ६० ग्राम.


प्रमेह गज केसरी वटी निर्माण विधि (preparation method of prameha gaja kesari vati ) - सब द्रव्यों को खरल में डाल कर निम्बू का रस डाल कर खूब अच्छी तरह से घुटाई करके सब द्रव्यों को एक जान कर लें और २-२ रत्ती की गोलियां बना कर छाया में सूखा कर शीशी में भर लें. (एक ग्राम में ८ रत्ती होता है. )


प्रमेह गज केसरी मात्रा और सेवन विधि (quantity and dosage of prameha gaja kesari vati ) - १-१ गोली सुबह शाम खाली पेट पानी के साथ लेना चाहिए. गुड़मार का काढ़ा बनाकर, इस काढ़े के साथ सेवन करने से शीघ्र लाभ होता है.

प्रमेह गज केसरी के लाभ (Advantages and health benefits of prameha gaja kesari ) - प्रमेह गज केसरी का सेवन करने से प्रमेह, मधुमेह, पेशाब में रुकावट और दाह आदि व्याधियां दूर होती है. मधुमेह रोग में रक्त शर्करा पर नियंत्रण होता है. इसके सेवन से पैन्क्रीअस को बल मिलता है और पैन्क्रीअस सक्रीय होकर रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है. अग्न्याशय की विकृति और रक्त शर्करा बढ़ने के दोष को दूर करने में प्रमेह गज केसरी गुणकारी सिद्ध होता है. प्रमेह गज केसरी वटी योग इसी नाम से बना बनाया आयुर्वेदिक दवा की दुकानों में मिलता है.

 

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