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मक्खन (Makkhan )

स्निग्ध एवं पोषक गुणयुक्त मक्खन
makkhan

हमारे रसोई घर में उपलब्ध पौष्टिक पदार्थों में से एक पदार्थ है मक्खन, जिसका प्रयोग बहुत कम किया जाता है. इस आर्टिकल में मक्खन के पोषक गुणों और उपयोग के बारे में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत की जा रही है. मक्खन दूध वर्ग का एक उत्पादन है जो दही को बिलो (मथ) कर छाछ बनाते समय निकलता है. मक्खन को तपा कर ही घी निकला जाता है. मक्खन का प्रयोग ज्यादातर ब्रेड पर लगा कर खाने या दाल सब्ज़ी में डाल कर खाने या सूप में डाल कर पीने में किया जाता है. आयुर्वेद ने मक्खन के गुण-कर्म और प्रभाव के विषय में उपयोगी जानकारी दी है.

मक्खन के विभिन्न भाषाओँ में नाम (name of makkhan in different indian languages ) -

संस्कृत - नवनीत
हिंदी - मक्खन
मराठी - लोणी
गुजराती - माखण
बांग्ला - नुनी
तेलुगु - पेन्ना
कन्नड़ - बेन्ने
फ़ारसी - मस्का
english - butter
लैटिन - बुटीरम (butyrum )

मक्खन के गुण (characteristics and qualities of makkhan ) - गाय के दूध से निकला हुआ मक्खन हितकारी, वृष्य, वर्ण को उत्तम करने वाला, बलकारी, अग्नि प्रदीपक, ग्राही और वातपित्त, रक्त विकार, क्षय, बवासीर, लकवा तथा खांसी को नष्ट करता है. आयुर्वेद के अनुसार मक्खन बालक और वृद्ध के लिए हितकारी है. बच्चों के लिए मक्खन अमृत के सामान है.

भैंस का मक्खन (buffalo makkhan ) - भैंस के दूध का मक्खन वात तथा कफ कारक, भारी और दाह, पित्त तथा थकावट को दूर करने वाला है और मेद तथा वीर्य बढ़ने वाला है.

ताजा मक्खन (fresh makkhan ) - ताज़ा मक्खन मधुर, ग्राही, शीतल, हल्का, नेत्रों को हितकारी, रक्तपित्त नाशक, तनिक कसैला और तनिक अम्ल रसयुक्त (खट्टा) होता है.

बासा मक्खन - खारा, चटपटा और खट्टा हो जाने से वमन, बवासीर, चर्मरोग, कफ प्रकोप, भारी और मोटापा करने वाला होता है अतः बासा मक्खन सेवन योग्य नहीं होता.

मक्खन के रासायनिक संघटन (chemical ingredients of makkhan ) - मक्खन में थोड़ा अंश पानी व् सूक्ष्म मात्रा में केसीनोजन होता है अतः अधिक देर तक रखा रहने पर इसमें दुर्गन्ध आने लगती है. इसमें कई वसलम होते हैं जो छोटी आंत में विटामिन बी की प्रचूषण -प्रक्रिया में सहायक होते हैं. मक्खन में विटामिन ा और डी होता है. १०० ग्राम मक्खन में नमी १८% और चिकनाई ८०% होती है.

मक्खन के उपयोग (uses of makkhan ) - मक्खन का उपयोग किसी खाद्य पदार्थ पर लगा कर खाने में किया जाता है. या आयुर्वेदिक औषधियों में , वाजीकारक और उष्ण प्रकृति की औषधियों के अनुपान के रूप में किया जाता है. ताज़े मक्खन से शिशु के शरीर पर मालिश करके आधा घंटा सुबह की धप्प में लिटाने से उसे सूखा रोग नहीं होता और शिशु हष्ट पुष्ट बना रहता है. मुख पर रोजाना मक्खन लगा कर मालिश करने से और फिर कुनकुने गर्म पानी से धोने से चेहरे की त्वचा का रंग साफ़ होता है. फुंसी मुहांसे व् झाइयां ठीक हो जाती हैं. दुबले बच्चों व् युवक युवतियों की प्रतिदिन मक्खन मिश्री १-१ चम्मच या अपनी पाचन शक्ति के अनुसार मात्रा में सुबह खली पेट खाना चाहिए. देर का रखा हुआ, खट्टा और दुर्गन्धित मक्खन सेवन योग्य नहीं होता

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