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चंद्रोदय वटी (chandrodaya vati )

चंद्रोदय वटी (chandrodaya vati )
chandrodaya vati

जो विवाहित पुरुष, युवा अवस्था अथवा प्रौढ़ अवस्था के हों तथा यौनशक्ति और सामर्थ्य में कमी का अनुभव करते हों, यौनांग में शिथिलता व् ठंडापन एवं शीघ्रपतन आदि यौन व्याधियों से ग्रस्त हों उनके लिए चंद्रोदय वटी बहुत ही लाभ करने वाली औषधि है. चंद्रोदय वटी में कोई भी मादक और हानिकारक द्रव्य नहीं है फिर भी यह योग शीघ्रपतन की स्थिति को नष्ट कर पौरुष क्षमता प्रदान करने वाला है. चंद्रोदय वटी का प्रयोग सिर्फ विवाहित पुरुषों को करना चाहिए और उचित आहार विहार तथा आचार विचार का पालन करना चाहिए.

चंद्रोदय वटी के घटक द्रव्य (ingredients of chandroday vati ) - स्वर्णचंद्रोदय एवं भीमसेनी कपूर २०-२० ग्राम, बंगभस्म, लौहभस्म, लौंग, जायफल, जावित्री, अकरकरा - ये सब ५-५ ग्राम, कस्तूरी व् अम्बर ३-३ ग्राम, तथा शुद्धकुचला सत्व आधा ग्राम.

चंद्रोदय वटी निर्माण विधि (preparation method of chandroday vati ) - पहले चंद्रोदय व् कपूर को खरल में डाल कर मिला लें फिर केसर, कस्तूरी और अम्बर डालकर नागर बेल के पत्तों का रस डालकर ३ घंटे तक खरल करें. इसके बाद शेष औषधियों का महीन कपड़छान चूर्ण डालकर नागर बेल के पत्तों के रस के साथ ६ घंटे तक घुटाई करके आधी आधी रत्ती की ( १ ग्राम में १६ ) गोलियां बना लें और छाया में सुखाकर शीशी में भर लें.

चंद्रोदय वटी मात्रा और सेवन विधि (chandrodaya vati quantity and dosage ) - सुबह शाम १-१ गोली मलाई के साथ खाकर ऊपर से मीठा दूध पियें.

चंद्रोदय वटी के लाभ ( advantages and health benefits of chandrodaya vati ) - चंद्रोदय वटी वाजीकरण करने वाले नुस्खों का सरताज है और निश्चित रूप से बल, ओज और पौरुष क्षमता प्रदान कर यौन दौर्बल्य और व्याधि को नष्ट करता है. मधुमेह रोग में भी यह योग लाभप्रद सिद्ध होता है. किसी भी कारण से उत्पन्न हुई नपुंसकता और कमजोरी दूर करने में यह योग व्यर्थ सिद्ध नहीं होता. यह उत्तेजक योग है इसलिए केवल विवाहित पुरुषों के लिए ही सेवन योग्य है. चंद्रोदय वटी योग बना बनाया बाज़ार में इसी नाम से मिलता है.

 

 

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