बादाम आयुर्वेद , बादाम के आयुर्वेदिक फायदे हिंदी में

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बादाम आयुर्वेद , बादाम के आयुर्वेदिक फायदे हिंदी में

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बादाम (Badam , Almond in hindi )

बादाम (Badam , Almond in hindi)
बादाम (Badam , Almond in hindi

बादाम एक बहुत ही पौष्टिक सूखा मेवा (dry fruit ) है जो सिर्फ खाद्य-व्यंजनों या मिठाइयों में ही नहीं बल्कि आयुर्वेदिक औषधियों के नुस्खों में भी प्रयोग किया जाता है. यूँ तो इसे पूरे वर्ष भर कभी भी सेवन किया जा सकता है पर शीतकाल के दिनों में इसका सेवन करना विशेष रूप से हितकारी होता है.

बादाम के विभिन्न भाषाओँ में नाम :-

संस्कृत - वाताद
हिंदी - बादाम
मराठी - गोड़ बदाम
गुजराती - बदाम
बंगाली - बादाम
तेलुगु - बदम
तामील - नटबाड़ूम
पारसी - बदामशीरी
english - sweet almond
latin - prunus ammygdalus

बादाम के गुण (characteristics and qualities of badaam , almond in hindi ) - मीठा बादाम मधुर, पौष्टिक एवं वीर्यवर्धक, पित्त तथा वातनाशक , स्निग्ध, गरम और कफकारक होता है तथा रक्तपित्त के रोगी के लिए हानिकारक होता है. कड़वा बादाम विषाक्त एवं हानिकारक होने से सेवन योग्य नहीं होता अतः इसका सेवन नहीं करना चाहिए.

बादाम का परिचय (introduction of badaam , almond in hindi ) - बादाम पश्चिमी एशिया , यूरोप, बलूचिस्तान, अफगानिस्तान, फारस, कश्मीर, पंजाब आदि में प्रचुर मात्रा में होता है . इसका रासायनिक संगठन इस प्रकार का है - इसकी मींगी में आर्द्रता ५.२, प्रोटीन २०.८, वसा ५८.९ , कार्बोहाइड्रेट १०.५, सूत्र १.७, खनिज द्रव्य २.९, प्रतिशत होते हैं. कैल्शियम २३०, ऑक्जेलिक अम्ल ४०७, फास्फोरस ४९०, लौह ४.५ मिग्रा प्रति १०० ग्राम के अलावा विटामिन बी काम्प्लेक्स तथा फोलिक एसिड पाए जाते हैं. मीठे बादाम में तेल ४४ से ५५% तक और कड़वे बादाम में ३८ से ४५% तक होता है. कड़वे बादाम में प्रोटीन अधिक और वसा कम होती है साथ ही इसमें एमिग्डेलीन भी लगभग २.५ से ३.५ % होता है. जिससे जलीय विश्लेषण के बाद हाइड्रोसायनिक एसिड बनता है जो एक विषाक्त तत्व है अतः कड़वा बादाम सेवन योग्य नहीं होता. बादाम का तेल हल्का पीला, साफ़, हलकी सी गंधयुक्त, स्वादरहित और बहुत गुणकारी होता है. इसे रोगन बादाम भी कहते हैं.

बादाम के लाभ, फायदे व् उपयोग (Advantages and health benefits of badam , almond in hindi ) - सूखे मेवे के रूप में बादाम का उपयोग मिठाई, हलवा, ठंडाई आदि में किया जाता है. पौष्टिकता, दिमागी शक्ति, स्नायविक सुदृढ़ता , नेत्रज्योति की रक्षा और बलवीर्य की वृद्धि के लिए बादाम का सेवन लाभप्रद होता है. बादाम सेवन करने की सबसे अच्छी विधि इसे पानी के साथ, चन्दन की तरह, पत्थर पर घिस कर दूध में मिलकर पीना है. इस पद्धति से सेवन करने पर बादाम ठीक से हज़म हो जाता है और शरीर के काम आ जाता है. पीस कर या चबाकर खानेपर पहलवानों , अत्यधिक शारीरिक श्रम करने वालों तथा जिनका हाज़मा बहुत ही अच्छा हो उन्हें तो हज़म हो जाता है पर हर किसी साधारण पाचन शक्ति वाले को हज़म नहीं होता और इसका सेवन व्यर्थ हो जाता है.

अब बादाम के कुछ आयुर्वेदिक घरेलु नुस्खे व् प्रयोग प्रस्तुत हैं (Now , we will list some ayurveda home remedy uses of badaam , almond in hindi )

१) पौष्टिक प्रयोग - शरीर को सुडौल , पुष्ट और सशक्त बनाने के लिए एक बादाम की गिरी सुबह एक कप पानी में डालकर रख दें. शाम को सोने से पहले इस गिरी का छिलका हटाकर इसे साफ़ पत्थर पर पानी के साथ घिस कर लेप कटोरी में उतार लें. एक कप ठंडा किया हुआ दूध लेकर इस दूध में यह लेप डाल दें और १-२ चम्मच शहद डालकर घोल लें. इसे घूंट-घूंट करके पी जाएँ. चाहें तो गिरी शाम को भिगोकर रख दें और सुबह खाली पेट इस विधि से सेवन करें. चाहें तो सुबह और रात तो सोते समय दोनों वक़्त सेवन कर सकते हैं. प्रति सप्ताह एक बादाम बढ़ाते जाएँ. इस प्रयोग के साथ ५ ग्राम असगंध का महीन चूर्ण मिलाना पुरुषों के लिए और शतावर का चूर्ण मिलाना स्त्रियों के लिए बहुत गुणकारी हो जाता है. विद्यार्थी युवक-युवतियों के लिए भी असगंध चूर्ण वाला प्रयोग उत्तम है. यह प्रयोग शरीर को पुष्ट बनाने वाला,सुडौल करने वाला, कमज़ोरी दूर करने वाला, दिमागी ताकत और नेत्रज्योति बढ़ाने वाला, बलवीर्य की वृद्धि करने वाला, स्त्रियों के स्तन पुष्ट और सुडौल बनाने वाला, चेहरा भरने वाला तथा कमर को शक्ति प्रदान करने वाला है. यह प्रयोग कम से कम ४० से ६० दिन तक नियमित रूप से करें.

 

 

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